ग्वालियर हाई कोर्ट ने धारा 582 BNSS के तहत हस्तक्षेप से किया इनकार, मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को बरकरार रखा
ग्वालियर हाई कोर्ट ने धारा 582 BNSS के तहत हस्तक्षेप से किया इनकार, मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को बरकरार रखा लेखक: Advocate Abhishek Jat 4 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर पीठ ने Ranjit Samar बनाम Smt. Krishna Raghuvanshi (Neutral Citation: 2025:MPHC-GWL:31623, MCRC No. 41537/2025) में एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध का संज्ञान लेने और पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा उसे बरकरार रखने के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके द्वारा पारित किया गया। इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष सक्सेना , जबकि प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक जाट उपस्थित हुए। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, शिकायतकर्ता श्रीमती कृष्णा रघुवंशी ने आरोप लगाया कि 1 मई 2023 की शाम लगभग 6 बजे वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने घर पर मौजूद थीं, तभी उनकी पुत्रवधू संध्या रघुवंशी, उसकी बहन किरण रघुवंशी तथा वर्तमान याचिकाकर्ता रंजीत समर वहाँ पहुँचे। आरोप यह था कि पारिवारिक विवाद के चलते आरोपियों ने न केवल मारप...







